दिल्ली HC से शिबू सोरेन को मिली राहत, JMM ने बीजेपी और निशिकांत दुबे पर बोला हमला


रांची:

दिल्ली हाई कोर्ट ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन के खिलाफ लोकपाल में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है. अदालत के आदेश पर झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से कहा गया है कि बीजेपी और निशिकांत दुबे के तमाम षडयंत्र को कानून की गहरी चोट लगी है. जेएमएम की तरफ से कहा गया है कि खुद को सर्वस्व समझना अंततः उसके पतन का सबब बन जाता है.  ऐसा ही भाजपा के साथ हो रहा है. झारखंड में सत्ता से दूर रहने का दर्द निशिकांत दुबे और बीजेपी से झेला नहीं जा रहा है.

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कभी सरकार गिराने की साजिश, कभी विधायकों को ख़रीदने के प्रयास, कभी संवैधानिक संस्थाओं की मदद से झामुमो अध्यक्ष दिशोम गुरु शिबू सोरेन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, सरकार के मंत्रियों और विधायकों के ख़िलाफ़ सुनियोजित षड्यंत्र, हर एक क्षेत्र में सांसद निशिकांत और भाजपा की तमाम कोशिशें चारों खाने चित्त हो रही है.

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे द्वारा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के खिलाफ ‘‘भ्रष्टाचार” की शिकायत के आधार पर यह कार्यवाही शुरू हुई थी. न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा कि मामले की विचारणीयता के संबंध में 75 वर्षीय नेता द्वारा उठाई गई आपत्ति पर भ्रष्टाचार-रोधी प्राधिकरण ने ध्यान नहीं दिया. न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘मामले की सुनवाई की अगली तारीख तक, लोकायुक्त के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक रहेगी. याचिकाकर्ता द्वारा न्यायिक अधिकार क्षेत्र को चुनौती दिए जाने पर ना ही कोई जवाब दिया गया और ना ही (प्राधिकरण द्वारा) इससे निपटा गया.”

सोरेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उनके मुवक्किल के खिलाफ शिकायत के साथ-साथ लोकपाल की कार्यवाही का विरोध किया और तर्क दिया कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के मद्देनजर कार्यवाही कानून सम्मत नहीं है और अधिकार क्षेत्र के बाहर है. अगस्त 2020 में अपनी शिकायत में भाजपा नेता दुबे ने आरोप लगाया था कि ‘‘ जनता के पैसे का दुरुपयोग कर और भारी भ्रष्टाचार में संलिप्त शिबू सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों ने अकूत धन एवं संपत्ति अर्जित की.”

शिकायत को स्वीकार करते हुए लोकायुक्त ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को शिकायत की प्रारंभिक जांच करने और अपनी रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था. लोकपाल ने चार अगस्त के अपने आदेश में शिकायत की विचारणीयता के संबंध में आपत्तियों पर विचार किए बिना मामले को आगे बढ़ाने का फैसला किया. इसके साथ ही लोकायुक्त ने यह निर्धारित करने के लिए कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया कि क्या याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है. वकील पल्लवी लांगर और वैभव तोमर के माध्यम से दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित” है. इस मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी.

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