Pitru Paksha 2022: 25 सितंबर तक चलेगा पितृ पक्ष, इस दौरान भूलकर भी ना करें ये 5 काम, नहीं तो लग सकता है पितृ दोष


Pitru Paksha Donts: पितृ पक्ष में भूल से भी ये 5 कार्य नहीं किए जाते हैं.

Pitru Paksha 2022 Donts: पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह 25 सितंबर तक चलने वाला है. पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष (Shradh Paksh 2022) के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान मुख्य रूप से पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं. मान्यता है कि इस दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से पितृ देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही पितृ दोष (Pitra Dosha) से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं कि इस बार 16 दिन तक चलने वाले पितृ पक्ष (Pitru Paksha) में कौन-कौन से 5 काम नहीं करने चाहिए. 

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नहीं की जाती है खरीदारी

धार्मिक मन्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान कोई भी नया सामान खरीदने से परहेज करना चाहिए. पितृ पक्ष के दौरान नए मकान, नए प्लॉट या प्रॉपर्टी इत्यादि नहीं खरीदना चाहिए. दरअसल मान्यता है कि ऐसा करने से घर में नकारात्मकता आने लगती है. ऐस में पितृ पक्ष के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

मांस-मदीरा का सेवन ना करें

श्राद्ध की सभी तिथियां पतृ देव को समर्पित होता है. इस दौरान जो लोग पिंडदान या तर्पण करते हैं या जो नहीं भी करते हैं, उन्हें मांस और मदीरा का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि पितृ पक्ष में ऐसा करने से पितर नाराज हो जाते हैं, जिससे पितृ दोष लगता है. 

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ना कटवाएं बाल-नाखून

पौराणिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में बाल-नाखून नहीं कटवाना चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने से हमारे पूर्वज नाराज हो जाते हैं. 

ना खाएं लहसुन-प्याज

पितृ पक्ष में लहसुन-प्याज का सेवन निषेध माना गया है. माना जाता है कि ये तामसिक होते हैं. जिसका सेवन करने के पूजा-पाठ या पर्पण-पिंडादान करने में मन विचलित होता है. ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान लहसुन-प्याज का सेवन करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे हमारे पितृ नाराज हो जाते हैं.

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मांगलिक कार्य हैं निषेध

पितृ पक्ष के दौरान मांगलिक कार्य निषेध माने गए हैं. मान्याता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों की नाराजगी से बचने के लिए इस दौरान किसी तरह का मांगलिक कार्य या जश्न ना तो मनाना चाहिए ना ही उसने शामिल होना चाहिए.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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